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यह किताब एक ऐतराज़ के जवाब में लिखी गई है जो पैग़म्बरे इस्लाम के हज़रते स़फ़िय्या से निकाह पर किया जाता है। अ़ल्लामा क़ासिम अल-क़ादिरी अल-अज़्हरी हफ़िज़हुल्लाहु तआ़ला ने मुख़्तलिफ़ कि़स्म के दलाइल को सामने रखकर इस ऐतराज़ का संतोषजनक जवाब दिया है।
इस निकाह़ पर पांच एतराज़ इस तरह किए जाते हैं कि:
[1] क्या सय्यिदह स़फ़िय्यह (रद़ियल्लाहु अ़न्हा) के वालिद और शौहर को क़त्ल करके, उन्हें ज़बर्दस्ती इग़्वा किया गया था!?
[2] क्या पहले शौहर की इ़द्दत गुज़ारे बिना, सय्यिदुना मुह़म्मद इब्ने अ़ब्दुल्लाह (ﷺ) ने उनसे उसी दिन निकाह़ या मुबाशरत (intercourse) कर ली थी!?
[3] क्या सय्यिदह स़फ़िय्यह (रद़ियल्लाहु अ़न्हा) की मर्ज़ी के बिना, सय्यिदुना मुह़म्मद इब्ने अ़ब्दुल्लाह (ﷺ) ने उनसे निकाह़ कर लिया था!?
[4] क्या सय्यिदह स़फ़िय्यह (रद़ियल्लाहु अ़न्हा) इस निकाह़ से कभी ख़ुश नहीं थीं!?
[5] क़ुरआन 2:234 में शौहर की मौत की इ़द्दत चार महीने दस दिन बताई गयी है. जबकि सय्यिदह स़फ़िय्यह (रद़ियल्लाहु अ़न्हा) को ये मुद्दत नहीं गुज़ारने दी गयी. तो क्या रसूलुल्लाह (ﷺ) ने क़ुरआन के ह़ुक्म के ख़िलाफ़ किया!?