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यह किताब एक ऐतराज़ के जवाब में लिखी गई है जो पैग़म्बरे इस्लाम के हज़रते स़फ़िय्या से निकाह पर किया जाता है। अ़ल्लामा क़ासिम अल-क़ादिरी अल-अज़्हरी हफ़िज़हुल्लाहु तआ़ला ने मुख़्तलिफ़ कि़स्म के दलाइल को सामने रखकर इस ऐतराज़ का संतोषजनक जवाब दिया है।